सिरदर्द ओर माइग्रेन से छुटकारा पाने के लिए प्राणायाम

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 सिरदर्द कभी गर्मी लगने से हो जाता है कभी शर्दी लगने से हो जाता है और कभी गैस के कारन सिरदर्द होता है। यदि शर्दी के कारन से सिर  दर्द है तो कपालभाति प्राणायाम करे, अगर गैस के कारन आपको सिरदर्द है तो अनुलोम विलोंम प्राणायाम करे। ये प्राणायाम १५ मिनिट से ले के ३० मिनिट तक करना चाहिए।
अनुलोम-विलोम प्राणायाम (ANULOM-VILOM PRANAYAM)

हाई बीपी समस्या के लिए करें यह तीन योग….

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हाई बीपी के लिए तीन योग….
हाई बीपी से देश करीब १० करोड़ लोग पीड़ित है। हाई बीपी का मुख्य कारन है तनाव,तनाव के लिए तीन प्राणायाम बहुत ही महत्वपूर्ण है, अनुलोमविलोम,भ्रामरी और शवासन  प्राणायाम।
रोज ३ से ४ लीटर पानी पीना चाहिए। लोकी का जुश साथमे आमला मिलाकर पीना चाहिए ,ध्यान रखिये लोकी कड़वी नहीं होनी चाहिए। इसे पीनी से हाई बीपी कंट्रोल होता है।
अनुलोमविलोम

योग से दूर होते हैं टेंशन रोग

योग से दूर होते हैं  टेंशन रोग

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर इंसान तनाव और टेंशन से गुजर रहा है। लेकिन इस तनाव का सबसे बुरा असर हमारे शरीर पर पड़ता है। ऐसे में हर दिन सिर्फ 5 मिनट के योग से ना सिर्फ आपका मन शांत होगा बल्कि टेंशन भी दूर होगी और शरीर और दिमाग भी फिट रहेगा। आगे की स्लाइड्स पर क्लिक करें और जानें कुछ ऐसे आसन जिससे दूर होगी आपकी टेंशन...

बलासन:- इसे चाइल्ड पोज भी कहते हैं। बच्चों की मुद्रा में बैठने से दिमाग को आराम मिलता है, तनाव और चिंता में कमी आती है। ये आसन हमारे तंत्रिका-तंत्र और लसीका प्रणाली के लिए भी काफी अच्छी है।

अल्‍सर का उपचार कैसे करें?

अल्‍सर, जिसे अक्सर आमाशय का अल्‍सर, पेप्टिक अल्‍सर या गैस्ट्रिक अल्‍सर कहते हैं, आपके आमाशय या छोटी आँत के ऊपरी हिस्से में फोड़े या घाव जैसे होते हैं। अल्‍सर उस समय बनते हैं जब भोजन को पचाने वाला अम्ल आमाशय या आँत की दीवार को क्षति पहुँचाता है। पहले यह माना जाता था कि अल्‍सर तनाव, पोषण या जीवनशैली के कारण होता है किन्तु वैज्ञानिकों को अब यह ज्ञात हुआ है कि ज्यादातर अल्सर एक प्रकार के जीवाणु हेलिकोबैक्टर पायलोरी या एच.

योग करें और किडनी को मजबूत बनाए

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किडनी शरीर के मुख्य अंगों में से एक है। शरीर में किडनी का काम है रक्त में से पानी और बेकार पदार्थों को अलग करना। इसके अलावा शरीर में रसायन पदार्थों का संतुलन, लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में भी सहायता करता है। इसका एक और कार्य है विटामिन-डी का निर्माण करना, जो शरीर की हड्डियों को स्वस्थ और मजबूत बनाता है

योग करें और पायें अस्थमा से मुक्ति

अस्थमा के लिए योग

अस्थमा फेंफड़ों से संबंधित बीमारी है। अस्थामा में छाती और गला संवेदनशील रहता है। अस्थामा का मरीज, धूल, धुवां या ज्यादा कोल्ड वातावरण बर्दाश्त नहीं कर सकता। जहां ज्यादा ऑक्सिजन नहीं है वहां रहने में भी उसे तकलीफ होती है। से अस्थमा से छुटकारा पाया जा सकता है।

 

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