ध्यान मुद्रा

विभिन्न योग परंपरा और अलग-अलग योग शिक्षकों की परंपराओं के भीतर ध्यान (meditation mudra)के लिए अलग-अलग शारीरिक मुद्राओं का सुझाव दिया जाता है। कई लोग लेटकर और खड़े होकर भी ध्यान करते हैं तो यह भी ध्‍यान मुद्रा ही मानी जाती है। हालांकि पद्मासन और सिद्धासन में बैठकर किया जाना वाला ध्यान ही सबसे प्रसिद्ध हैं।

ध्यान मुद्रा (meditation pose or posture) के दो अर्थ है पहला कि हम कौन से आसन में बैठें और दूसरा कि यह एक प्रकार की हस्त मुद्रा का नाम भी है जिसे ध्यान मुद्रा कहते हैं। पद्मासन या ‍सिद्धासन में आंखें बंदकर बैठना ध्यान आसन कहलाता है।

पतंजलि योग स्कूल की ओऱ से नववर्ष की शुभकामनाएँ

  
पतंजलि  योग स्कूल परिवार नें  सभी देश वासियों  को नववर्ष की हार्दिक शुभकामना दी है. उन्होंने कामना की है कि नव वर्ष सभी देश वासियों के लिये मंगलमय हो. देश में शांति सौहार्द और भाईचारे का वातावरण रहे.साथ ही ईश्वर से यह कामना कि यह वर्ष 2016  सभी देश वासियों  के लिए उन्नति एवं सम्पन्नता लाए  

वरुण और वायु मुद्रा

वरुण और वायु मुद्रा

हमारा शरीर पाँच तत्वों से मिलकर बना है। शरीर में जल और वायु तत्व का संतुलन बिगड़ने से वात और कफ संबंधी रोग होते हैं। इन रोगों की रोकथाम के लिए ही में कई मुद्राओं के महत्व को बताया गया है। यहाँ प्रस्तुत है वरुण और वायु मुद्रा का संक्षिप्त परिचय।

ज्ञान मुद्रा

ज्ञान मुद्राः तर्जनी अर्थात प्रथम उँगली को अँगूठे के नुकीले भाग से स्पर्श करायें। शेष तीनों उँगलियाँ सीधी रहें।हाथ की तर्जनी (अंगूठे के साथ वाली) अंगुली के अग्रभाग (सिरे) को अंगूठे के अग्रभाग के साथ मिलाकर रखने और हल्का-सा दबाव देने से ज्ञान मुद्रा बनती है| बाकी उंगलियां सहज रूप से सीधी रखें| इस मुद्रा का सम्पूर्ण स्नायुमण्डल और मस्तिष्क पर बड़ा ही हितकारी प्रभाव पड़ता है|

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