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बिमारियों में योग श्रेष्ठ थेरेपी'

स्वामी विवेकानंद योग रिसर्च फाउण्डेशन के अध्यक्ष डा. एच आर नागेन्द्र ने दावा किया कि मधुमेह, अस्थमा, मोटापा, मानसिक तनाव और उच्च रक्तचाप के लिए योग श्रेष्ठ उपाय है।

महात्मा गांधी अस्पताल और मेडिकल कालेज में आयोजित व्याख्यानमाला और संवाददाताओं से बातचीत में डा. नागेन्द्र ने कहा कि प्रतिदिन एक घंटे सही तरीके से योग करने से इन बीमारियों से सौ प्रतिशत निजात मिल सकती है और आधुनिक दवाइयों से मुक्ति पाई जा सकती है।

दुनिया भर में रही योग की धूम

ऐसा विश्व इतिहास में विरले ही होता है जब सारी दुनिया में किसी वजह से हर तरह की सीमा टूट जाए। 21 जून, 2015 को पहले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस ने धर्म, राष्ट्र से लेकर अमीर-गरीब तक की सारी सीमाओं को तोड़ दिया। पेरिस से लेकर न्यूयार्क तक, सिडनी से लेकर तंजानिया तक, इटली से लेकर बीजिंग तक के निवासियों ने न सिर्फ योग शिविरों में हिस्सा लिया बल्कि भारत की 'वसुधैव कुटुंबकम' के सिद्धांत को सही साबित किया। केंद्र सरकार और दुनिया में 150 देशों से ज्यादा जगहों पर स्थित भारतीय दूतावासों ने इन आयोजनों को सफल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।

35 हजार से अधिक योगाभ्यासियों के साथ राजपथ बना 'योगपथ', गिनीज वर्ल्ड बुक में दर्ज हुआ विश्व कीर्तिमान

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर यहां राजपथ पर आयोजित समारोह स्थल पर आज 35985 लोगों ने योग किया और इसमें 84 देशों के प्रतिनिधि मौजूद थे जिससे यह कार्यक्रम गिनीज वर्ल्ड रिकाडर्स बुक में दर्ज हो गया। आयुष मंत्री श्रीपद नाइक ने आंकड़ों का हवाला देते हुए संवाददाताओं से कहा कि यह भारत के लिए गर्व की बात है कि हमने एक दिन में दो कीर्तिमान स्थापित किये।

192 देशों के 251 शहरों में बजा भारत के योग का डंका

पहले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर रविवार को पूरी दुनिया में भारत की सांस्कृतिक धरोहर योग का डंका बजा। भारत के सदियों पुराने ज्ञान का परचम पहली बार कश्मीर से कन्याकुमारी तक ही नहीं, बल्कि सरहद की सीमा लांघ दुनिया के 192 देशों के 251 शहरों में लहराया। योग के जलवे से जल, थल और आकाश भी अछूता नहीं रहा। 

थल सेना के जवान सियाचिन की दुर्गम और बर्फ से ढकी पहाड़ की चोटियों पर योग करते नजर आए तो नौसेना के जवानों ने समुद्र में योग साधना की। राजपथ पर विदेशियों समेत तमाम देशों के दूतावासों के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया। 

अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस 21 जून को ही क्यों

हाल ही में सँयुक्त राष्ट्र महासभा ने भारत के प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी के इस प्रस्ताव का एकमत से समर्थन किया कि 21 जून को अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया गया ।

भारत की इस पहल का न सिर्फ़ सँयुक्त राष्ट्र संघ के सभी सदस्य देशों ने पूरा-पूरा समर्थन किया, बल्कि सँयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पाँच स्थाई सदस्य देशों सहित 175 देश इस प्रस्ताव के प्रायोजक भी बन गए। पर्यवेक्षकों ने सँयुक्त राष्ट्र संघ की इस प्रतिक्रिया को नरेन्द्र मोदी की बड़ी कूटनीतिक विजय माना है। रेडियो रूस के विशेषज्ञ बरीस वलख़ोन्स्की ने कहा :

राजपथ पर हजारों लोगों के साथ मोदी ने किया योग

आज भारत समेत पूरी दुनिया में पहला अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जा रहा है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजपथ से पूरी दुनिया को योग का संदेश दिया। पीएम मोदी ने करीब 37 हजार लोगों के साथ राजपथ पर योग भी किया। करीब 35 मिनट के योग के दौरान 18 आसन किए गए।

योग के दौरान प्रधानमंत्री बच्चों के बीच भी गए और उन्हें योग करते हुए देखा। योग आसन खत्म करने के बाद भी पीएम मोदी बच्चों से मिले। राजपथ पर योग दिवस के कार्यक्रम में योगगुरु बाबा रामदेव भी मौजूद रहे। इससे पहले पीएम ने अपने संबोधन में देशवासियों को योग की अहमियत और खूबियों से अवगत करवाया।

पतंजलि योग स्कूल ने मनाया प्रथम अंतरराष्ट्रीय योग दिवस

पतंजलि योग स्कूल बरेली द्वारा प्रथम अंतरराष्ट्रीय योग दिवस

मनाया गया इस अवसर पर योगाभ्यास कराया गया जिसमें काफी संख्या में महिलाओं  एवं पुरुषों ने भाग लिया 

योग प्रशिक्षक श्री गिरिजा कान्त सिंह ने योग के बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी तथा यह भी बताया की आज के भौतिक युग में मनुष्य अपने जीवन में योग को अपनाकर स्वथ्य एवं निरोगी रह सकता हैं !

प्रशिक्षक द्वारा यह भी जानकारी भी गई कि किन-किन  बिमारियों में कौन - कौन से योगभ्यास  करके स्वस्थ्य हुआ जा सकता है 

 

बनारस में जल से जेल तक और स्कूल से देवालय तक योग ही योग

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को लेकर देश भर में लोग योग करने और उसे सीखने में जुटे हैं। वाराणसी में भी जेल से लेकर जल तक और स्कूल से लेकर देवालय तक हर जगह योग करते लोग दिख रहे हैं। ये योग के प्रति एक नई तरह की जागरूकता है। ऐसा नहीं कि अपने देश में पहले से योग नहीं रहा है, लेकिन इन दिनों योग को लेकर जैसी जागरूकता आई है, वो अगर वाकई जीवनचर्या में उतर जाता है, तो ये सभी के स्वास्थ्य के लिए बेहतर होगा।

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