Naturopathy

प्राकृतिक चिकित्सा से कम नहीं है कुंभ स्नान एवं कल्पवास

कुंभ स्नान तथा कल्पवास

कुंभ स्नान तथा कल्पवास एक तरह का प्राकृतिक चिकित्सा का ही रूप है जो लोग कुंभ स्नान करते हैं एवं 45 दिन का कल बात करते हैं उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है तथा उन्हें जल्द बीमारियां अपना शिकार नहीं कर पाती कुंभ स्नान करने से कई प्रकार के चर्म रोग एवं अन्य रोग भी ठीक हो जाते हैं कुंभ स्नान एवं कल बात करने से कई प्रकार के शारीरिक विकार दूर होते हैं एवं मानसिक विकार भी दूर होते हैं कुंभ स्नान एक अमृत पान की तरह स्नान के दौरान जल में मौजूद नए पुराने ज्ञात अज्ञात सूक्ष्म जीवाणु शरीर में प्रवेश करते हैं इसीलिए व्यक्ति इन सूक्ष्म जीवाणुओं के रोग प्रतिरोधक क्षमता अपने शरीर में विकसित कर लेता है

अल्‍सर का उपचार कैसे करें?

अल्‍सर, जिसे अक्सर आमाशय का अल्‍सर, पेप्टिक अल्‍सर या गैस्ट्रिक अल्‍सर कहते हैं, आपके आमाशय या छोटी आँत के ऊपरी हिस्से में फोड़े या घाव जैसे होते हैं। अल्‍सर उस समय बनते हैं जब भोजन को पचाने वाला अम्ल आमाशय या आँत की दीवार को क्षति पहुँचाता है। पहले यह माना जाता था कि अल्‍सर तनाव, पोषण या जीवनशैली के कारण होता है किन्तु वैज्ञानिकों को अब यह ज्ञात हुआ है कि ज्यादातर अल्सर एक प्रकार के जीवाणु हेलिकोबैक्टर पायलोरी या एच.

प्राकृतिक चिकित्सा प्रणाली खुराक चिकित्सा

प्राकृतिक चिकित्सा प्रणाली  खुराक चिकित्सा

इस थेरेपी के अनुसार, भोजन प्राकृतिक रूप में लिया जाना चाहिए। ताज़े मौसमी फल, ताज़ी हरी पत्तेदार सब्जियां और अंकुरित भोजन बहुत ही लाभकारी हैं। ये आहार मोटे तौर पर तीन प्रकार में विभाजित हैं जो इस प्रकार हैं:

प्राकृतिक चिकित्सा प्रणाली क्या है ?

 प्राकृतिक चिकित्सा प्रणाली क्या है ?

प्राकृतिक−चिकित्सा−प्रणाली का अर्थ है प्राकृतिक पदार्थों विशेषतः प्रकृति के पाँच मूल तत्वों द्वारा स्वास्थ्य−रक्षा और रोग निवारण का उपाय करना। विचारपूर्वक देखा जाय तो यह कोई गुह्य विषय नहीं है और जब तक मनुष्य स्वाभाविक और सीधा−सादा जीवन व्यतीत करता रहता है तब तक वह बिना अधिक सोचे−विचारे भी प्रकृति की इन शक्तियों का प्रयोग करके लाभान्वित होता रहता है। पर जब मनुष्य स्वाभाविकता को त्याग कर कृत्रिमता की ओर बढ़ता है, अपने रहन−सहन तथा खान−पान को अधिक आकर्षक और दिखावटी बनाने के लिये प्रकृति के सरल मार्ग से हटता जाता है तो उसकी स्वास्थ्य−सम्बन्धी उलझनें बढ़ने लगती हैं और समय−समय पर उसके शरीर में कष