Diseases and Treatment

हृदय रोगों में योगासनों के लाभ

भारत में हर साल दिल की विमरियो या हार्ट अटैक से लाखो मौत होती हैं यह बीमारी मानसिक तनाव दूषित खान पान व्लड प्रेशर आदि कारणों से होती है योग एक जरिया है जिससे हम अपने दिल को बीमारियों से सुरक्षित रख सकते हैं। ऐसे योगासन हैं, जिसमें सबसे ज्यादा फोकस सांसों पर होता है, जिससे हमारा रेस्पिरेटरी सिस्टम दुरुस्त रहता है।दिल की बीमारियों को कार्डिवस्‍कुलर डिजीज कहा जाता है। चिकित्‍सीय भाषा में दिल की बीमारियों के लिए यही शब्‍दावली इस्‍तेमाल की जाती है। रजिस्‍ट्रार जनरल ऑफ इंडिया और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के एक नए शोध के मुताबिक भारत में बड़ी संख्‍या में लोग दिल की बीमारियों के कारण गंवाते ह

लड़का हो या लड़की योग करो स्वस्थ रहो

लड़का हो या लड़की योग करो स्वस्थ रहो

योगा, विश्व को आज के शहरीकरण के दौर में स्वस्थ रखने का रामबाण इलाज है, जिसके तर्ज पर ही 21 जून को विश्व योगा दिवस के मनाया जाता है। योग सभी के लिए है और इसका नियमित अभ्‍यास करने से सभी प्रकार की बीमारियां दूर होती हैं। यह न केवल बीमारियों से बचाता है बल्कि नियमित योग करने से शरीर मजबूत होता है। लड़कों को योग क्‍यों करना चाहिए, इससे उनको क्‍या-क्‍या फायदा होगा। इस लेख में इसके बारे में चर्चा करते हैं।

73% योगा टीचर लड़कियां हैं, ऐसे में ह्वाई शुड गर्ल्स हैव ऑल द योगा?

इससे आपकी बॉ़डी फ्लेक्सिबल होगी और दर्द की शिकायत कम होगी।

प्राणायाम से मिलने वाले समस्त सामान्य लाभ

प्राणायाम के लाभ
  1. भस्त्रिका प्राणायाम: ष्श्वास को यथाषक्ति फेफड़ो में पूरा भरना एवं बाहर छोड़ना। यह प्राणायाम एक से पाँच मिनट तक किया जा सकता है। लाभ: सर्दी, जुकाम, श्वास रोग, नजला, साइनस, कमजोरी, सिरदर्द व स्नायु रोग दूर होते है। फेफड़े एवं हृदय स्वस्थ होता है।
  1. कपालभाति प्राणायाम: ष्श्वास को यथाषक्ति बाहर छोड़कर पूरा ध्यान श्वास को बाहर छोड़ने में होना चाहिए। भीतर श्वास जितना अपने आप जाता है उतना जाने देना चाहिए। श्वास जब बाहर छोड़ंेगे तो स्वाभाविक रूप से पेट अन्दर आयेगा। यह प्राणायाम यथाशक्ति पाँच मिनट तक प्रतिदिन खाली पेट करना चाहिए।

अपानवायु मुद्रा

मुद्राओं का जीवन में बहुत महत्व है। मुद्रा दो तरह की होती है पहली जिसे आसन के रूप में किया जाता है और दूसरी हस्त मुद्राएँ होती है। मुद्राओं से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ प्राप्त किया जा सकता है। यहाँ प्रस्तुत है प्राण, अपान और अपानवायु मुद्रा की विधि और लाभ।

प्राण मुद्रा : छोटी अँगुली (चींटी या कनिष्ठा) और अनामिका (सूर्य अँगुली) दोनों को अँगूठे से स्पर्श करो। इस स्थिति में बाकी छूट गई अँगुलियों को सीधा रखने से अंग्रेजी का 'वी' बनता है।
 

 

भूचरी आसन दिमाग तेज रखने और याददाश्त बढ़ाने के ल‌िए

आसन

काम में ध्यान न लगे या फिर पढ़ी हुई चीजें न याद रहें, याददाश्त और दिमाग से जुड़ी छोटी-छोटी समस्याओं का पुख्ता उपचार योग में मौजूद है।

ऐसे में योग की भूचरी मुद्रा का नियमित अभ्यास न सिर्फ याददाश्त बढ़ाने में मदद करता है बल्कि यह मानसिक शांति देता है और फोकस बढ़ाता है। साथ ही, इसके नियमित अभ्यास से बहुत अधिक गुस्से पर काबू पाया जा सकता है।

जानिए, इस मुद्रा की सही विधि और आप खुद आजमाकर देखिए।

– इसे करने के लिए सुखासन में यानी पालथी मारकर सीधे बैठें और कमर सीधी रखें।

– अब हथे‌लियों को ऊपर की ओर करके अपनी जांघों या घुटनों पर रखें। आराम महसूस करें।

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