मधुमेह कारण एवं निदान

कारण
हम दैनिक जीवन में जो आहार लेते हैं उससे हमारे शरीर को विभिन्न पोषक घटक प्राप्त होते हैउसमे शर्करा एक महत्वपूर्ण घटक है ।हमारे भोजन से प्राप्त शर्करा रक्त में मिलकर कोशिकाओं मैं जाती हैं जहां यह ऊर्जा मैं परिवर्तित होती है। रक्त शर्करा को ऊर्जा मैं परिवर्तित होने के लिए एक उतूप्रेरक इन्सुलिन की आवश्यकता होती हैं जो अग्नाशय मैं स्त्रवित होता है।शरीर में वात ,पित्त ,कफादि त्रिदोषज बिषमता जनित विभिन्न रोगों के कारण अग्नाशय मैं प्राकृतिक इन्सुलिन का स्त्राव अनियमित हो जाता है। इससे रक्त शर्करा का ऊर्जा मैं अपचयन नहीं हो पाता तथा शर्करा रक्त मैं रह जाती है।रक्तशर्करा के निरंतर अपरिवर्तन् से रक्त मैं शर्करा की वृद्धि हो जाती है। इसे मधुमेह कहते हैं । आधुनिक चिकित्सा पद्धति मैं मधुमेह के उपचार में मुख्य ब्याधि रक्तशर्करा को मानकर उसी का शमन् किया जाता है जिसमें या तो शर्करा का रक्त मैं ही शमन कर दिया जाता है जिससे शरीर को वांछित ऊर्जा प्राप्त नही हो पाती या अप्राकृतिक इन्सुलिन दिया जाता है जिससे अग्नाशय मैं प्राकृतिक इन्सुलिन स्त्राव निष्क्रिय होता जाता है ।
उपचार
स्वर्ण माक्षिक भस्म मैं समान भाग त्रिफला चूर्ण मिलाकर चार रत्ती(480mg)की मात्रा मैं लेने से मधुमेह निर्मूल हो जाता है ।
जैसा कि उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि मधुमेह विभिन्न रोगों के परिणाम स्वरूप इन्सुलिन की अनियमितता का परिणाम है अत: मधुमेह का उपचार सह रोगों के लक्षणों के आधार पर किया जाना श्रेष्ठ होता है। यदि मधुमेह के साथ हाथ पैर में जकड़ न युक्त दर्द, याददाश्त मैं या श्रवण शक्ति मैं कमी हो तब पांच पत्ती तुलसी की सुबह खाली पेट लेना चाहिए ।
मधुमेह मैं कब्ज हो तब 20ग्राम अलसी सुबह नाश्ते के साथ लेना चाहिए ।
मधुमेह के साथ हाथ पैरों मैं जलन ,चक्कर अधिक भूख प्यास, नींद न आती हो तब अश्वत्थ बीज चूर्ण (पीपल के फल के बीज) का चूर्ण 2 रत्ती,श्रंग भस्म 1रत्ती मिलाकर आधा कप छाछ के साथ ले ।
मधुमेह के साथ लक्षण स्थाई न हो तब पीपल, अमरूद एवं आम के दो दो पत्तेलेकर चटनी बनाकर ले।
किसी योग्य योग प्रशिक्षक के निर्देशन मैं शंख प्रक्षालन करने से अतीव लाभ होता है । इसके साथ ही अथ्र्दमत्येन्द्रसन एवं अन्य मधुमेह संबंधी आसन करने से मधुमेह जड़ से समाप्त होता है