पतंजलि योग स्कूल ने गणतंत्र दिवस पर देशवासियो को बधाई दी

पतंजलि योग स्कूल ने आज णतंत्र दिवस के पावन अवसर पर देशवासियो  को बधाई दी हैं 

योग शिक्ष श्री गिरिजा कान्त जी ने कहा कि आज का दिन यह सोचने का नही है कि भारत ने हमे क्या दिया, आज हमे इस पर विचार करना है कि भारत के लिए हमने क्या किया, हमारा क्या योगदान है। किसी भी देश की पहचान उसके देशवासियों से होती है, उनके विचारों से होती है, उनकी लगन, मेहनत और इच्छा-शक्ति से होती है। आज विश्व हमारी तरफ़ आशा भरी निगाहों से देख रहा है, आइए गणतन्त्र दिवस के पावन पर्व पर शपथ लें कि हम देश के लिए योगदान करेंगे, कुछ ऐसा योगदान जो देश को और आगे ले जा सके। गणतंत्र दिवस को संविधान स्थापना के समारोह के रूप में मनाया जाता है तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है, लेकिन इसे राष्ट्रीय उत्सव कहना इस राष्ट्र का अपमान है। ऐसा नहीं है कि हमारे देश में कोई राष्ट्रीय उत्सव नहीं है। उदाहरण के लिए मकर संक्रांति एक राष्ट्रीय उत्सव ही है। इसे मनाने के लिए सरकार को कुछ भी नहीं करना होता है और यह पूरे देश में भिन्न-भिन्न नामों से मनाया जाता है। कहीं पोंगल, तो कहीं बिहु, कहीं मकर संक्रांति तो कहीं टुसु के नामों से पूरा देश इसे मनाता है और सरकार द्वारा छुट्टी नहीं दिए जाने के बावजूद मनाता है। इसप्रकार के अनेक उत्सव हैं, जिन्हें राष्ट्रीय उत्सव कहा जा सकता है। इसलिए इस गणतंत्र दिवस पर आइए सोचें कि इस देश की राजनीति को इस देश की मिट्टी से कैसे जोड़ा जाए? सोचें कि आखिर क्यों बापू चाहते थे कि भारत की राजनीति धर्माधारित हो, सेकुलर नहीं?