Bandh

 बन्ध अभिप्राय है - बन्धन, एक साथ मिलाना या पकड़। यह एक प्रकार की शारीरिक स्थिति है जिसमें शरीर के कुछ अवयव या अंगों को सिकोड़ा अथवा नियंत्रित किया जाता है। शरीर में प्राण के संचार हेतु ऊर्जा के अपव्यय को रोकने में बन्ध का उपयोग किया जाता है तथा अन्यत्र हानि पहुंचाए बिना ऊर्जा को यथास्थान ले जाने में बन्ध का उपयोग सावधानीपूर्वक किया जाना आवश्यक भी है। प्रमुख बन्ध ये हैं-

  • मूल बन्ध
  • उड्डियान बन्ध
  • जालन्धर बन्ध
  • महा बन्ध

मूलबन्ध

मूलबन्ध

बन्ध

मूलबन्ध --- मूल गुदा एवं लिङु -स्थान के रन्ध्र को बन्द करने का नाम मूलबन्ध है । वाम पाद की एडी को गुदा और लिङु के मध्यभाग में दृढ लगाकर गुदा को सिकोडकर योनिस्थान अर्थात् ‍ गुदा और लिङु एवं कन्द के बीच के भाग को दृढतापूर्वक संकोचन द्वारा अधोगत अपानवायु को बल के साथ धीरे -धीरे ऊपर की ओर है । अन्य आसनों के साथ एडी को सीवनी पर बिना लगाये हुए भी मूलबन्ध लगाया जा सकता है ।